दुख की अदायगी

October 12, 2021

दुख तुम्हें वह सब देता है जो सुख नहीं दे सकता। वास्तव में सुख तुम्हें हर चीज से वंचित कर देता है।

सुख तुमसे वह सब छीन लेता है जो कभी तुम्हारे पास था, जो तुम कभी थे; सुख तुम्हें मिटा देता है। दुख तुम्हारे अहंकार को पोषित करता है और सुख मूलत: निरहंकार की अवस्था है।

वही समस्या है और वही समस्या की जड़। तभी सुखी होना लोगों को बहुत कठिन लगता है। तभी संसार में लाखों लोग दुख में ही जीते हैं.. उन्होंने दुख में ही जीने की ठान ली है। यह तुम्हें बहुत सूक्ष्म अहंकार देता है। दुख में तुम सुखी होते हो पर तुम नहीं होते। दुख में सूक्ष्म अहंकार; सुख में तुम्हीं मिट जाते हो। अगर यह समझ में आ जाए तो बात एकदम स्पष्ट हो जाती है।

दुख तुम्हें विशिष्ट बनाता है। सुख स्मष्टिगत घटना है, उसमें कुछ विशेष नहीं है। वृक्ष सुखी हैं, पशु सुखी हैं और पक्षी सुखी हैं। पूरा अस्तित्व सुखी है, सिवाय मनुष्य के। दुखी होने से व्यक्ति बहुत विशिष्ट हो जाता है। दुख तुम्हें लोगों का ध्यान आकर्षित करने में कुशल बनाता है। तुम जब भी दुखी होते हो, तुम्हारी ओर ध्यान दिया जाता है, तुम से सहानुभूति की जाती है, तुम्हें प्यार मिलता है। हर कोई तुम्हारा ध्यान रखता है। दुखी व्यक्ति को चोट कौन पहुंचाएगा? दुखी व्यक्ति से ईष्र्या कौन करेगा? दुखी व्यक्ति का कौन विरोध करेगा?

यह तो बहुत घटिया बात होगी। दुखी व्यक्ति का ध्यान रखा जाता है, उसे प्रेम दिया जाता है, उसकी देख-रेख होती है। दुख में बहुत निवेश संभव है। अगर पत्नी दुखी नहीं है तो पति उसे भूलेगा ही। अगर वह दुखी है तो पति उसे नजरअंदाज नहीं कर सकता। अगर पति दुखी है तो पूरा परिवार-पत्नी, बच्चे-सब उसके इर्द-गिर्द होते हैं; इससे बहुत सुख मिलता है। तुम्हें लगता है कि तुम अकेले नहीं हो, तुम्हारा परिवार है, तुम्हारे मित्र हैं। जब तुम बीमार होते हो, दुखी होते हो तो मित्र तुम्हें देखने आते हैं, तुम्हें सांत्वना देते हैं।

जब तुम प्रसन्न होते हो तो वही मित्र तुमसे ईष्र्या करते हैं। जब तुम वास्तव में प्रसन्न होते हो तो तुम पाओगे कि सारा संसार तुम्हारे विरु द्ध हो गया है..सुखी व्यक्ति को कोई भी नहीं चाहता क्योंकि सुखी व्यक्ति दूसरों के अहंकार को चोट पहुंचाता है। दूसरे को लगता है,’ तो आप सुखी हैं और हम अभी भी अंधेरे, दुख और नरक में कुलबुला रहे हैं। जब हम दुख में हैं तो आप सुखी होने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं!’ संसार तो दुखी व्यक्तियों से बना है और किसी के पास भी संसार के विरोध में जाने का साहस नहीं है, यह बड़े जोखिम का काम है।




 
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