बीसीसीआई ने वीवो से एक साल के लिए आईपीएल करार किया निलंबित

August 7, 2020
- भाषा
नई दिल्ली

बीसीसीआई ने भारत और चीन के बीच बढ़ते राजनयिक तनाव के बीच बृहस्पतिवार को चीनी मोबाइल फोन कंपनी वीवो के साथ आईपीएल के आगामी सत्र के लिए टाइटल प्रायोजन करार निलंबित कर दिया।

बीसीसीआई ने एक पंक्ति का बयान भेजा जिसमें कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गयी और इसमें कहा गया कि वीवो इस साल आईपीएल के साथ जुड़ा नहीं होगा।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ‘बीसीसीआई और वीवो मोबाइल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2020 में इंडियन प्रीमियर लीग के लिए अपनी साझेदारी को निलंबित करने का फैसला किया है।’ वीवो कंपनी ने कहा कि इस करार को विराम (पॉज) दिया गया है। इसके बयान के अनुसार, ‘बीसीसीआई और वीवो मोबाइल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने आपसी रजामंदी से इंडियन प्रीमियर लीग के 2020 सत्र के लिए अपनी भागीदारी को विराम देने का फैसला किया है।’ वीवो ने 2018 से 2022 तक पांच साल के लिए 2190 करोड़ रुपए (प्रत्येक वर्ष करीब 440 करोड़ रुपए) में आईपीएल प्रायोजन अधिकार हासिल किए थे। दोनों पक्ष एक योजना पर काम कर रहे हैं जिसमें वीवो फिर से तीन साल के लिए संशोधित शतरें पर 2021 से वापसी कर सकता है। हालांकि बीसीसीआई के एक शीर्ष अधिकारी का इस पर विचार कुछ अलग था।

बीसीसीआई के एक अनुभवी अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ‘हम यहां कूटनीतिक तनाव की बात कर रहे हैं और आप उम्मीद कर रहे हो कि नवम्बर में जब आईपीएल खत्म हो जाएगा और अगला आईपीएल अप्रैल 2021 में शुरू होगा तो चीन विरोधी भावना नहीं होगी ? क्या हम गंभीर हैं ? इस करार के खत्म होने से फ्रेंचाइजी को भी नुकसान हो सकता है क्योंकि उन्हें भी प्रायोजन करार से काफी बड़ा हिस्सा मिलता था।
सालाना वीवो प्रायोजन राशि का आधा हिस्सा आठ फ्रेंचाइजी में बराबर बराबर बांटा जाता है जो 27.5 करोड़ रुपए तक आता है। अधिकारी ने कहा, ‘अभी बीसीसीआई के लिए इतने कम समय में इस प्रायोजन राशि के बराबर प्रायोजक ढूंढना बहुत मुश्किल होगा। इसलिए बीसीसीआई और फ्रेंचाइजी दोनों को कुछ घाटे के लिए तैयार हो जाना चाहिए। बीसीसीआई को ज्यादा लेकिन प्रत्येक फ्रेंचाइजी को वीवो के जाने से संभवत: 15 करोड़ रुपए का नुकसान होगा।’ उन्होंने कहा, ‘इस साल सभी के लिए मुश्किल होगा लेकिन शो चलता रहना चाहिए।’


 
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