सूर्य और सविता

February 15, 2021

मानव व सूर्य के आदि काल से ही महान भावनात्मक संबंध रहे हैं।

वैदिक वाङ्मय सूर्य के माहात्म्य, उनकी विश्व संचालन में चेतनात्मक भूमिका तथा सूर्योपासना के लाभों के विवरणों से भरा पड़ा है। सूर्य मानव के लिए प्राणदाता, जीवन रक्षक व सांस्कृतिक विकास का परिचायक है।

संसार के हर तत्व की तरह सूर्य तत्त्व भी त्रिआयामी है। आधिभौतिक, आधिदैविक एवं आध्यात्मिक ये उनके तीन आयाम हैं। वैज्ञानिकों ने सूर्य देव के भौतिक रूप से सम्पर्क कर प्रकाश, ऊर्जा एवं काल ज्ञान प्राप्त किया है। प्राचीन भारतीय विचारक मात्र पदार्थ विद्या के जानकार नहीं होते थे, अपितु देवतत्त्व तथा आत्म-तत्त्व के भी मर्मज्ञ होते थे।

उनकी अभिव्यक्ति-प्रणाली एक साथ त्रिस्तरीय थी। स्वाभाविक है कि इसके लिए अनुपम मेधा की आवश्यकता है, जिसकी पूर्ति वे गायत्री मंत्र के द्वारा करते थे। सूर्य का दैविक पक्ष कहीं, अधिक सशक्त और रहस्यमय है। इसकी उपासना से पवित्रता, प्रखरता, वर्चस्व, तेजस्व प्राप्त होता है। ब्रह्माण्ड के रहस्य जाने जा सकते हैं। सिर्फ  भौतिक विज्ञान द्वारा तीनों स्तरों का ज्ञान संभव नहीं होगा।

आधिदैविक रहस्य को समझने के लिए उपकरण भी आधिदैविक चाहिए। देवता किसी की प्रतिकृति नहीं, वरन विशिष्ट गुणों या शक्तियों के रूप में सूक्ष्म जगत में क्रियाशील हैं। सूर्य व सविता के स्वरूप को वेद स्पष्ट करता है। सविता अर्थात सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों के सूयरे में समान विराजमान, प्रेरक दिव्य शक्ति रूप परब्रह्म परमात्मा। ऋषि के अनुसार ब्रह्माण्ड का प्रत्येक सूर्य सविता है। ऋग्वेद के ‘ú विानि देव सवितर्दुरितानि परासुव, यद्भद्रं तन्न आसुव’ मंत्र में श्रेष्ठ विचारों को सूर्य के माध्यम से आमंत्रित किया गया है।

सविता अमृत तत्त्व का स्रोत है। आदित्य देवताओं का मधु है। आदित्य का आधिभौतिक रूप है परमाणु, आधिदैविक रूप है-ग्यारह प्रमुख देवगणों में से एक आदित्य देव तथा आध्यात्मिक रूप है चेतना। आदित्य-सविता सर्वव्यापी ब्रह्म है। सूर्य जगत की आत्मा है। यहां सूर्य शब्द से विश्व को प्रकाशित करने का व आकाश में उगने वाले सूरज से किसी को अर्थ नहीं लगाना चाहिए और न यह भ्रम पालना चाहिए कि यही विात्मा है। जिस प्रकार शरीर व आत्मा का संबंध है, कुछ इसी प्रकार का संबंध सूर्य और सविता में है।




 
News In Pics