आज कुंभ राशि में प्रवेश करेगा सूर्य, जानें आपकी राशि पर क्या होगा असर

February 13, 2020
- पंडित प्रसाद दीक्षित
ज्योतिषाचार्य एवं पूर्व ट्रस्टी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी

ग्रहों के राजा सूर्य राजा 13 फरवरी की शाम करीब 7 बजे सूर्य मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। ये ग्रह 14 मार्च तक कुंभ राशि में ही रहेगा।

सौरमंडल के सभी ग्रह सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होते रहते हैं। वे सभी सूर्य की निरंतर परिक्रमा करते रहते हैं। हमारी पृथ्वी भी सौरमंडल की एक सदस्य है और वह सूर्य से प्रकाशित होकर अनवरत उसकी परिक्रमा करती रहती है। पृथ्वी में भी आकर्षण शक्ति है जिसके कारण सूर्य भी प्रकाश ताप इत्यादि भेंट करता रहता है। इसके फलस्वरूप पृथ्वी के जीवधारियों में प्राण एवं शक्ति का संचार होता है। ग्रहों में जो ग्रह सूर्य से जितना निकट होता है उसका वेग सूर्य के प्रभाव से उतना ही तेज हो जाता है। सूर्य पूर्व दिशा का स्वामी, अग्नि तत्व प्रधान प्रकृति का, पुरुष प्रधान एवं क्षत्रिय गुणों से युक्त होता है। इसका स्वरूप कालिमा के साथ रक्तिम बाबुल लिए हुए, भव्य गंभीरता लिए हुए, प्राकृतिक गुणों से संपन्न, ओजस्वी मुख्य मंडल, चेहरा लंबाई की अपेक्षा चौड़ाई लिए हुए, बात में मधुर, पराक्रम से कार्य करने वाले, प्रतिरोध लेने की भावना अत्यंत तीव्र होती है।

सूर्य के साथ बुध के अलावा कोई भी ग्रह बैठा हो तो वह अस्त हो जाता है। बुध को राजकुमार ग्रह कहते हैं। यह सूर्य के साथ हो तो उसे सूर्य की महादशा काला अंतर्दशा काल में बुध आदित्य योग बना कर विशेष फलदाई होता है। यदि सूर्य अपनी उच्च राशि का एकादश भाव में हो तो राज योग बनाता है। यदि किसी भी ग्रह के साथ सूर्य बैठा हो तो साथ में बैठे ग्रह का प्रभाव बढ़ता है और साथ में बैठने वाला ग्रह अनुकूल फल प्रदान करने में सक्षम होता है। सूर्य हड्डी और नेत्र का प्रमुख कारक ग्रह होता है। कुछ ग्रह ऐसे भी होते हैं जो अन्य ग्रहों के योग से नए रोग उत्पन्न कर देते हैं। सूर्य और चंद्र की युति यदि छठे भाव अर्थात रोग स्थान में हो तो ह्रदय रोग अथवा जालंधर को उत्पन्न करता है। षष्ठ भाव में सूर्य, मंगल एवं केतु की युक्तिसे अथवा सूर्य चंद्र एवं केतु के एक साथ होने से भेंगापन अथवा दृष्टि दोष उत्पन्न होता है। इसी भाव में सूर्य शुक्र की युक्ति से गुप्त रोग अथवा गुप्तांग रोग, सूर्य मंगल की युक्ति से जोड़ों में दर्द, सूर्य राहु बुध की युक्ति से आंत संबंधित रोग, शनि की युक्ति सूर्य के साथ कुंभ राशि अथवा मकर राशि में हो तो वायु विकार, सूर्य और राहु की युति लग्न, छठे एवं अष्टम भाव में हो तो हार्टअटैक हो सकता है।

यदि सूर्य, राहु एवं शनि तीनों पाप ग्रह एक साथ रोग स्थान में हो तो पोलियो की शिकायत का होना सुनिश्चित है। कर्क राशि का सूर्य शनि की दृष्टि से युक्त हो तो बवासीर की बीमारी, अष्टम भाव में बैठा सूर्य, मंगल तथा शनि से दृष्ट हो एवं साथ ही चंद्र राहु से ग्रसित हों अथवा प्रभाव में हो तो मिर्गी रोग हो सकता है। यदि लग्न अशुभ सूर्य शत्रु क्षेत्री हो तो सूर्य की महादशा काल में एवं शुक्र की अंतर्दशा काल कुष्ठ रोग, गुप्तांग रोग इत्यादि रोगों से ग्रसित होना अवश्यंभावी है। सूर्य के मित्र ग्रह गुरु , मंगल, चंद्र एवं बुध हैं जबकि शत्रु ग्रह शनि, शुक्र, राहु एवं केतु हैं। सूर्य मित्र के घर अथवा मित्र राशि के साथ बैठा हो तो उत्तम शुभ फल देता है जबकि शत्रु के घर अथवा शत्रु ग्रह से युक्त हो तो निर्बल होकर फल प्रदान करता है। गुरु वार 13 फरवरी, 2020 को रात्रि में 7:08 पर सूर्य का प्रवेश कुंभ राशि में हो रहा है जो शुक्रवार को दिन में 2:22 बजे तक रहेगा। कुंभ राशि का स्वामी शनि है जो सूर्य का शत्रु है। अत: द्वादश राशियों पर सूर्य का प्रभाव एक माह के लिए पड़ना भी अवश्यंभावी है।

किस राशि पर क्या पड़ेगा प्रभाव
मेष राशि को सूर्य का उत्तम फल मिलेगा। इस राशि वालों की चांदी रहने वाली है। वृष राशि वालों को सामान्य सुख प्राप्त होगा। मिथुन राशि वाले को देशाटन से सर्वाधिक लाभ प्राप्त होगा। कर्क राशि वाले यात्रा करने से सर्वाधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सिंह राशि वालों की चांदी रहेगी। प्रतिष्ठा में भी चार चांद लगना सुनिश्चित हैं। कन्या राशि वालों को सर्वाधिक लाभ प्राप्त होगा। तुला राशि को सामान्य सुख मिलेगा। वृश्चिक राशि वालों को पूर्वोत्तर दिशा से सर्वाधक लाभ प्राप्त होगा। धनु राशि वालों के लिए पद प्रतिष्ठा का बढ़ना सुनिश्चित है। मकर राशि वालों को अपयश लगेगा। आप इससे बचने के लिए रोली और लाल पुष्प भगवान सूर्य के निमित्त  सूर्योदय के समय किसी मंदिर में चढ़ा दें। कुंभ राशि वालों को नुकसान रहेगा। कुंभ राशि वालों को चाहिए कि सूर्य को ठीक करने के लिए ‘ú घृणि सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करते रहें। मीन राशि वालों को चारों दिशाओं से लाभ प्राप्त होगा।
 


 
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