आप लॉकडाउन का पालन करेंगे या नहीं, आपके जीन निर्धारित करेंगे

May 23, 2022

पूरी दुनिया में, लोगों ने कोविड-19 का प्रकोप झेला है और उनकी सेहत पर इसका प्रभाव पड़ा, हालांकि, बीमारी का प्रभाव सभी के लिए समान नहीं था। हम जानते हैं कि शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य आंशिक रूप से पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होते हैं, उदाहरण के लिए कोविड-19 महामारी, लेकिन इसमें प्रकृति (आनुवंशिकी) का भी आंशिक प्रभाव होता है।

कोविड-19 ने महामारी शोधकर्ताओं और वैज्ञानिक समुदाय को इस दिशा में अनुसंधान पर सहयोग करके इसके बारे में आनुवंशिकी पहल बनाने के लिए एक साथ आने का अनूठा अवसर दिया। पूरे समुदाय अचानक और एक साथ वायरस और सरकारी लॉकडाउन के अनुकूल होने के लिए आवश्यक सामाजिक परिवर्तनों दोनों के संपर्क में आ गए।

हमने समय के साथ आनुवंशिकी और व्यक्तियों की सेहत पर महामारी के प्रभाव के बीच संबंधों की जांच की है। हमने पाया कि लॉकडाउन को लेकर लोगों का भरोसा उनकी आनुवंशिकी से जुड़ा हुआ था।

डेटा लाइफलाइन्स अध्ययन से 27,537 प्रतिभागियों से एकत्र किया गया था, जिसने 2006 से नीदरलैंड के तीन उत्तरी प्रांतों (ड्रेन्थे, फ्रिज़लैंड, ग्रोनिंगन) में कई पीढ़ियों के 167,000 व्यक्तियों का अनुसरण किया है।

अध्ययन अपने प्रतिभागियों से विस्तृत जानकारी और जैविक नमूने एकत्र करता है। हमने प्रतिभागियों से यह पूछते हुए प्रश्नावली भेजी कि क्या उन्हें कोविड हुआ था, साथ ही उनके सामान्य स्वास्थ्य और दवा के उपयोग, सामाजिक जनसांख्यिकी जैसे आय और शिक्षा, भलाई और जीवन शैली के बारे में भी सवाल पूछे गए।

जेनेटिक्स और कोविड

कई व्यवहार और मानसिक लक्षण हमारे डीएनए के कुछ हिस्सों से प्रभावित होने के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के लिए, 102 ज्ञात तरीके हैं जिनसे डीएनए की विभिन्न व्यवस्थाएं अवसाद के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। हमारे विश्लेषण के लिए, हमने प्रत्येक प्रतिभागी को एक तथाकथित पॉलीजेनिक स्कोर दिया, जो दर्शाता है कि उनके डीएनए (उनकी आनुवंशिक प्रवृत्ति) के आधार पर उनके पास एक विशिष्ट विशेषता होने की कितनी संभावना थी, और इसकी तुलना प्रश्नावली में उनकी प्रतिक्रियाओं से की।

इस तरह के स्कोर व्यक्तियों के व्यवहार की भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं, लेकिन उनका उपयोग यह देखने के लिए किया जा सकता है कि विपरीत परिस्थितियों का सामना करने पर विभिन्न आनुवंशिक प्रवृत्ति वाले लोगों के समूह अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं। उदाहरण के लिए, जिन लोगों में आनुवंशिक रूप से उच्च जीवन संतुष्टि होने की संभावना अधिक थी, उन्होंने प्रश्नावली में जीवन की उच्च गुणवत्ता की सूचना दी, जैसा कि अपेक्षित था।

कुल मिलाकर, हमने पाया कि 288 प्रश्नावली प्रतिक्रियाओं को प्रतिभागियों की आनुवंशिकी से जोड़ा जा सकता है। विशेष रूप से, हमने पाया कि सरकार में विश्वास और कोविड-19 लॉकडाउन नियमों का पालन करने की इच्छा प्रतिभागियों की आनुवंशिक प्रवृत्ति के साथ निकटता से जुड़ी हुई थी।

आनुवंशिकी का प्रभाव कैसे बदल गया

नीदरलैंड में पहली बार कोविड-19 का पता चलने के बाद हमने पहली बार प्रश्नावली भेजी और महीने में कम से कम एक बार महामारी के दौरान एक ही सवाल भेजते रहे। इसने हमें अलग-अलग समय बिंदुओं पर पॉलीजेनिक स्कोर के प्रभावों की तुलना करने में मदद दी।

हमने पाया कि अच्छी सेहत के लिए आनुवंशिक योगदान स्थिर नहीं था, लेकिन समय के साथ बदल सकता है।

प्रतिभागियों की आनुवंशिकी का सबसे स्पष्ट प्रभाव उच्च जीवन संतुष्टि के लक्षण के लिए था। यहां हमने पाया कि महामारी के दौरान आनुवंशिकी अधिक महत्वपूर्ण हो गई और बाहरी कारकों का प्रभाव कम हो गया।

इस आशय की कई व्याख्याएँ हैं। कोविड-19 रोकथाम उपायों द्वारा लगाए गए सामाजिक अलगाव का मतलब है कि लोगों का पर्यावरणीय कारकों पर कम नियंत्रण था जो उनके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते थे। वैकल्पिक रूप से, यह भी मामला हो सकता है कि कुछ आनुवंशिक कारकों से लोगों में तनाव को झेल पाने की क्षमता में सुधार हुआ जिससे कुछ लोग महामारी के लंबे समय तक मनोवैज्ञानिक प्रभावों को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर पाए।

हमारे परिणाम मनोरोग और अन्य मनोवैज्ञानिक लक्षणों का अध्ययन करने के लिए इस संबंध में अन्य देशों के डेटा को शामिल करने के महत्व को प्रदर्शित करते हैं ताकि हम बेहतर ढंग से समझ सकें कि इन स्थितियों वाले लोगों की मदद कैसे करें।
 


भाषा
ग्रोनिंगन (नीदरलैंड्स)

 
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