2020 में हो जाएगा सभी समस्याओं का समाधान: सहाराश्री

February 13, 2020
- भाषा/एसएनबी
नयी दिल्ली

सहारा समूह के प्रमुख “सहाराश्री” सुब्रत रॉय जी ने इस साल सभी समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि दो बड़े विदेशी निवेशकों से सहारा के रियल एस्टेट और सिटी डेवलपमेंट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए निवेश पर सार्थक बात हुई है। इसके साथ ही उन्होंने सेबी में जमा किए गए लगभग 22,000 करोड़ रूपए भी इस साल वापस आने की उम्मीद जताई है।

सहारा समूह के प्रमुख “सहाराश्री” सुब्रत रॉय जी ने सभी सहारा निवेशकों को यह भी आश्वासन दिया है कि उन्हें उनकी निवेशित राशि पूरे ब्याज के साथ मिलेगी और एक दिन की देरी के लिए भी अतिरिक्त ब्याज दिया जाएगा। 1 फरवरी 2020 को मनाए गए सहारा समूह के 42वें स्थापना दिवस के अवसर पर निवेशकों को लिखे पत्र में, सहाराश्री ने कहा, “समूह हमेशा समय पर भुगतान और सेवाओं में उत्कृष्टता की अपनी परंपरा को बरकरार रखता है, लेकिन पिछले सात वर्षों के दौरान भुगतान में देरी हुई है, जिसके लिए ‘कुछ अवांछनीय परिस्थितियां’ जिम्मेदार हैं।”

पूंजी बाजार नियामक सेबी के साथ विवाद पर रॉय ने कहा कि संपत्तियों की बिक्री या गिरवी रखने से या ज्वांइट वेंचर से मिली पूरी राशि को सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के कारण सेबी-सहारा रिफंड खाते में जमा कर दिया गया है।

2020 में हो जाएगा सभी समस्याओं का समाधान: सहाराश्री

● दो बड़े विदेशी निवेशक रियल एस्टेट और सिटी डेवलपमेंट व्यवसायों में हमारे साथ- सहाराश्री
● हालात पहले ही ठीक हो जाते, यदि मिलती आवास विकास में व्यापार की छूट- सहाराश्री
● सेबी में जमा 22000 करोड़ रु. भी इस साल वापस आने की उम्मीद- सहाराश्री
● एक दिन की भी देरी पर हर निवेशक को दिया जाएगा अतिरिक्त ब्याज- सहाराश्री
● कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जो इस साल सारी समस्याओं को दूर कर देंगे- सहाराश्री

सहाराश्री ने कहा, “इसमें से, हम संगठनात्मक कार्यों के लिए एक रुपये का भी उपयोग नहीं कर सकते हैं, यहां तक ​​कि सम्मानित निवेशकों का पैसा चुकाने के लिए भी इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि सहारा के पास जमीनें हैं, लेकिन वहां इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए धन की कमी है जिस कारण उन पर टाउनशिप या कॉलोनियां विकसित करना मुश्किल हो गया है। सेबी-सहारा खाते में बड़ी रकम जमा होने की वजह से आवासीय इकाई के खरीदारों द्वारा किए गए अग्रिम भुगतान का धन भी इसी खाते में है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को जल्द ही हल कर दिया जाएगा क्योंकि “दो बड़े विदेशी निवेशक हमारी रियल एस्टेट और सिटी डेवलपमेंट व्यवसायों में हमारे साथ आ रहे हैं।” “सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए, कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो इस वर्ष, यानी 2020 के भीतर सहारा की समस्याओं को हल कर देंगे।”

सेबी ने 2011 में सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SIRECL) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SHICL) को वैकल्पिक रूप से OFCD (Optionally Fully Convertible Bonds) के माध्यम से लगभग तीन करोड़ निवेशकों से जुटाए गए धन को वापस करने का आदेश दिया था।

अपील और क्रॉस-अपील की लंबी प्रक्रिया के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त, 2012 को सेबी के निर्देशों को बरकरार रखा, जिसमें दोनों फर्मों से निवेशकों से वसूले गए धन को 15 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने को कहा गया था।

सहारा को अंततः निवेशकों की धन वापसी के लिए सेबी के साथ अनुमानित 24,000 करोड़ जमा करने के लिए कहा गया था, हालांकि समूह ने हमेशा इसे “दोहरे भुगतान” के रूप में बनाए रखा है क्योंकि यह पहले से ही सीधे 95 प्रतिशत से अधिक निवेशकों को वापस कर दिया गया था।

कल वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सहारा-सेबी विवाद के बारे में जानकारी दी थी और ये भी बताया था कि भुगतान के लिए एक कट ऑफ डेट तय कर दी गई थी जिसके बाद कोई दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस मसले पर सहाराश्री कहते हैं, कि “चौथे विज्ञापन में, सेबी ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि इसके बाद, किसी भी दावे को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह अंतिम विज्ञापन लगभग एक साल पहले सामने आया था, जिसका अर्थ है कि आगे कोई भुगतान लंबित नहीं है। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार 22,000 करोड़ अंततः सत्यापन के बाद सहारा में वापस आ जाएगा।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, सेबी के पास लंबित धन वापसी आवेदनों में ब्याज के हिस्से को छोड़कर अधिकतम 20 से 25 करोड़ रूपये की देनदारी ही शामिल हैं।

सेबी ने अपनी अंतिम वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि 'सेबी-सहारा रिफंड' खाते में पड़े 20,173 करोड़ रुपये (निवेशकों को किए गए रिफंड के लिए प्रदान करने के बाद उस पर अर्जित ब्याज राशि के साथ वसूली गई राशि) को राष्ट्रीयकृत बैंकों में 31 मार्च, 2019 को उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार जमा करवाया गया था।

सहाराश्री ने कहा कि “सहारा समूह पर लगाई गई बंदिशें व्यवसाय करना मुश्किल बना रही हैं। हालात बहुत पहले ही ठीक हो जाते, यदि हमें सिर्फ आवास विकास में व्यापार करने के लिए थोड़ी सी छूट दे दी जाती।”

उन्होंने कहा कि समूह के पास पूरे भारत में हजारों एकड़ भूमि है, लेकिन वे 100 से 300 एकड़ के बड़े पार्सल में फैली हुई हैं। रियल एस्टेट बाजार में व्यापक मंदी के कारण ऐसे बड़े भूखंडों के लिए कोई खरीदार तैयार नहीं हैं।

जबकि कुछ इच्छुक खरीदार हैं, जो वास्तविक मूल्य का एक-चौथाई या उससे भी कम की पेशकश कर रहे हैं, लेकिन इतनी कम दरों पर सौदा संभव नहीं है, क्योंकि सहारा को सरकारी सर्कल रेट के 90 प्रतिशत से नीचे कोई भी बिक्री करने की अनुमति नहीं है।


 
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